नीरज बाजपेई ने दिया आदर्श व्यापार मंडल से दिया इस्तीफा

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JNI NEWS : 03-01-2014 | By : Jagendra | In : shahjahanpur news

xxx— जिलाध्यक्ष पर गुटबाजी व धोखाधड़ी का आरोप, प्रदेश अध्यक्ष से शिकायत
— ग्रीन कार्ड शिविर में बने कार्डों से हटवा दिया था नीरज बाजपेई का नाम
— ग्रीन कार्ड बनवाने व शिविर के टैंट का खर्च नीरज ने किया था वहन

शाहजहांपुर। उप्र आदर्श व्यापार मंडल के वरिष्ठ जिला उपाध्यक्ष नीरज बाजपेई ने पद व सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। उन्होंने अपना इस्तीफा प्रदेश अध्यक्ष को डाक से भेजते हुए जिलाध्यक्ष पंकज वर्मा सराफ पर गुटबाजी व कार्यकर्ताओं के साथ धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
बता दें कि अभी 18 दिसंबर को आदर्श व्यापार मंडल द्वारा ग्रीन कार्ड शिविर का आयोजन किया गया था। इस शिविर के आयोजन के लिए हुई बैठक में सभी ने छह हजार का चंदा करके जिलाध्यक्ष को दिया था। इसके अतिरिक्त ग्रीन कार्ड छपवाने व शिविर में टैंट कुर्सी की व्यवस्था की जिम्मेदारी वरिष्ठ उपाध्यक्ष नीरज बाजपेई को सौपी गई थी। ग्रीन कार्ड के पीछे नीरज बाजपेई का नाम पता छपा था। यहां तक सब ठीक था, लेकिन जब ग्रीन कार्ड लोगों के हाथ तक पहुंचे तो नीरज बाजपेई का नाम गायब था और नाम पर काला पेंट करके जिलाध्यक्ष पंकज वर्मा, जिला महामंत्री रमेश चंद्र शुक्ला, नगर अध्यक्ष जितेंद्र नाथ शुक्ला, नगर महामंत्री अजय मोहन शुक्ला के नाम पिं्रट थे। ग्रीन कार्ड पर अपना नाम गायब देखकर नीरज बाजपेई ने जब जिलाध्यक्ष से पूछा तो उन्होने सारा दोष सीओ सिटी राजेश्वर सिंह पर मढ़ दिया और कहा कि सीओ सिटी ने कहा कि नीरज का नाम होगा तो मैं ग्रीन कार्ड पर हस्ताक्षर नहीं करूंगा। नीरज बाजपेई का कहना है कि वह सामाजिक कार्यकर्ता हैं और रामलीला मेला खिरनीबाग के प्रबंधक हैं, इस नाते सीओ सिटी उन्हें भलीभांति जानते हैं। इसके अलावा वह आदर्श विकलांग कल्याण संस्था के प्रदेश सचिव है। यह संस्था हर साल विकलांगों के हितार्थ कई कार्यक्रम करती है। इन कार्यक्रमों में राज्यपाल से लेकर मंत्री और डीएम एसपी तक भाग लेते रहते हैं। ऐसे में पंकज वर्मा का यह कहना कि सीओ सिटी ने उनके नाम पर आपत्ति की, सीओ की छवि को ठेंस पहुंचाने जैसा है।
श्री बाजपेई ने कहा कि जिस संगठन में इस तरह की गुटबाजी हो वहां मुझ जैसे समाजसेवी का दम घुटता है। इसलिए अपने पद व सदस्यता से इस्तीफा दे रहा हूं। उन्होने कहा कि जिलाध्यक्ष को चंदा की गई रकम के खर्च का ब्यौरा भी देना चाहिए। आखिर जब कार्ड व शिविर के टैंट कुर्सी का खर्च उन्होंने स्वयं व्यय किया तो पंकज सराफ के पास जमा चंदे के छह हजार कहां खर्च हो गए?

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